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तस्मै श्री गुरुवे नमः…गुरू पूर्णिमा पर अघोर गुरूपीठ बनोरा में बाबा प्रियदर्शी राम के प्रति आस्था और समर्पण का ज़बरदस्त प्रवाह

अघोर गुरूपीठ ब्रह्मनिष्ठालय बनोरा आश्रम के भीतर अघोर परंपरा के संत बाबा प्रियदर्शी राम की मौजूदगी मात्र ही उनके हज़ारों हज़ार अनुयायियों के चेहरे पर मुस्कान और मन में आस्था का सबसे बड़ा कारण है। बनोरा आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन अपने आप में इस अंचल की एक बड़ी परंपरागत आध्यात्मिक गतिविधि है क्योंकि साल में यही वो एकमात्र दिन होता है जब गुरू शिष्य परंपरा अपने बेहद ख़ूबसूरत स्वरूप में सामने आती है। 10 जुलाई गुरूवार की सुबह से ही बनोरा आश्रम में गुरू पूर्णिमा के मौक़े पर हर शिष्य अपने गुरु बाबा प्रियदर्शी राम के लिये कुछ न कुछ भेंट उपहार हाथ में ज़रूर लेकर पहुंचा हुआ था, भले ही वो फूलपत्ती ही क्यों न हो और जो सक्षम था वो अपने सामर्थ्य के मुताबिक़ भेंट उपहार अपने मालिक के लिये देश के कोने कोने से पहुंचा हुआ था, ज़्यादातर लोग तो परिवार सहित आये हुए थे, जिनके रुकने और खाने की सारी व्यवस्था आश्रम प्रबंधन की तरफ़ से की गई थी। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु दर्शनार्थ आने वाले हज़ारों हज़ार भक्तों के लिए महाभण्डारे में भोजन प्रसाद ग्रहण की व्यवस्था भी आश्रम प्रबंधन की तरफ़ से की गई थी।

आश्रम का उपासना स्थल और वहीं सोफ़े पर हाथ जोड़े बैठे अपने भक्तों को सुख शांति का आशीर्वाद देते मालिक बाबा प्रियदर्शी राम के हर अनुयायी, हर शिष्य आश्रम की व्यवस्था के मुताबिक़ क़तारबद्ध होकर आते, गुरु को भेंट अर्पित कर हाथ जोड़ या शीश झुकाकर प्रणाम करते, फिर बस एक नज़र गुरू से मिलाकर आगे निकल जाते, गुरूदर्शन का यह सिलसिला सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक अनवरत जारी रहा। उपासना स्थल के ठीक पीछे बाबा प्रियदर्शी राम के भक्तों के लिये प्रसाद की व्यवस्था भी की गई, जिसमें हर व्यक्ति हैसियत के लिहाज़ से एक बराबर लग रहे थे क्योंकि आख़िर थे तो सब गुरुभाई और गुरु बहन ही। आश्रम में आने वालों में ऐसे ऐसे भक्त भी हैं, जो बाबा प्रियदर्शी राम का सान्निध्य कई दशकों से पाकर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं। एक समय के बाद उपासना स्थल से थोड़ा विराम लेकर अघोर संत गुरु बाबा प्रियदर्शी राम अपनी नियमित बैठक वाली जगह पर जाकर बैठे, इस बैठक का स्वरूप भी बिलकुल उपासना स्थल वाले ही था, बाबा के सभी भक्त दो दो लाईन बनाकर दर्शन के पहुंचते, दर्शन करने के बाद अपने गुरु को भेंट चढ़ाते और गुरु प्रसाद लेकर आगे निकल जाते।

चूंकि बाबा प्रियदर्शी राम के शिष्यों में बहुत से अति विशिष्ट श्रेणी प्राप्त शिष्य भी हैं, इसलिए उनके प्रोटोकॉल का भी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने विशेष ख़्याल रखा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्तमंत्री ओपी चौधरी सहित तमाम अतिविशिष्ट श्रेणी के भक्त भी दोपहर में गुरू दर्शन के लिए पहुंचे, चूंकि अतिविशिष्ट श्रेणी प्राप्त लोगों का अलग ही प्रोटोकॉल रहता है, जिसका नियंत्रण जिला प्रशासन संभालता है। बावजूद इसके बाबा प्रियदर्शी राम के निर्देश पर अघोर गुरूपीठ ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने मिलकर बेहतर सामंजस्य के साथ VVIP मूवमेंट की व्यवस्था को ऐसा स्वरूप दिया, जिससे आम भक्तों को किसी प्रकार की समस्या ना हो।

दिनभर गुरू के प्रति अटूट आस्था और समर्पण व्यक्त करने का सिलसिला जारी रहा, बनोरा आश्रम के बाहर और भीतर मेले जैसा वातावरण देखने को मिला। शाम पांच बजे पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम का भक्तों के लिए तक़रीबन घंटे भर का आर्शीवचन नवनिर्मित भव्य हाईटेक मंच पर हुआ, आशीर्वचन में बाबा प्रियदर्शी राम ने अपने अनुयायियों को जीवन को सफ़लता और सरलता से जीने के लिए ज़रूरी और व्यावहारिक उपाय भी बताये। बाबा प्रियदर्शी राम के प्रति सभी आस्थावान भक्तों अनुयायियों ने इस गुरू पूर्णिमा पर भी बड़े पैमाने पर भीतर गहरे तक सकारात्मक ऊर्जा का अहसास किया।

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