



लक्ष्मीपुर में राष्ट्रवादी चेतना का शैक्षणिक संस्थान सरस्वती शिशु मंदिर संचालित है और इसी के ठीक पीछे मटन मछली का बाज़ार भी नगर निगम द्वारा संचालित किया जा रहा है, इस बाज़ार से उठने वाली दुर्गंध की वजह से सरस्वती शिशु मंदिर के अलावा आसपास के आवासीय क्षेत्र में भी हालात तक़लीफदेह रहते हैं। अब तक तो इस मटन मछली मार्केट के विस्थापन को लेकर कोई ठोस प्लानिंग निगम प्रशासन ने नहीं की थी, सरस्वती शिशु मंदिर संचालन समिति ने मौजूदा शहर सरकार को मटन मछली मार्केट के विस्थापन के लिए पहले याचक की भूमिका में आग्रह किया और फिर लहज़े में थोड़ी सख़्ती बरतते हुए अल्टीमेटम भी दिया, पर अब तक मटन मछली मार्केट के विस्थापन को लेकर शहर सरकार से केवल आश्वासन ही मिलता आया है, आज के हालातों पर अगर ग़ौर करें तो जो कि झूठा साबित होता आया है। ख़बर है कि मटन मछली मार्केट के लिए भगवानपुर में कोई जगह निगम की तरफ़ से फ़ाइनल की जा चुकी है मगर उस बात को भी महीनों गुज़र चुके हैं, मटन मछली मार्केट अपनी पुरानी जगह पर ही बना हुआ है। अब तो मटन मछली मार्केट हटाने को लेकर नगर निगम प्रशासन और चायवाले महापौर के नेतृत्व वाली शहर सरकार के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा बढ़ता जा रहा है। ख़बर तो यह भी है कि आने वाले अंग्रेज़ी नये साल 2026 के पहले हफ़्ते में ही स्थानीय रहवासियों के साथ सरस्वती शिशु मंदिर संचालन समिति नगर निगम में विपक्ष के नेता शेख सलीम नियारिया को विश्वास में लेकर शहर सरकार और निगम प्रशासन के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकती है, तब की स्थिति में शहर सरकार को मामला संभालना मुश्किल पड़ सकता है।

ग़ौरतलब है कि शहर सरकार के मुखिया महापौर और उनकी केबिनेट ने सरस्वती शिशु मंदिर संचालन समिति के लिखित और मौखिक आग्रह को अब तक गंभीरता से लिया ही नहीं है, इसीलिये मटन मछली मार्केट के विस्थापन के प्रति सत्ता पक्ष की तरफ़ से लगातार उदासीनता ही देखने को मिल रही है। वहीं अगर मटन मछली के बाज़ार को पूरे शहर के संदर्भ में देखें तो मुख्य मार्गों के किनारे और गली मोहल्लों को मिलाकर पचासों जगह अवैध तौर पर मटन मछली मार्केट संचालित हैं बावजूद इसके निगम प्रशासन और शहर सरकार इन विषम हालातों पर काबू पाने में अब तक नाकाम साबित हुई है। बहरहाल अब देखना ये है कि लक्ष्मीपुर मटन मछली मार्केट हटाने को लेकर शहर सरकार संवेदनशील हो पाती है या नहीं? क्या सरस्वती शिशु मंदिर संचालन समिति के अगुआ पदाधिकारी अब तक की तरह चुप ही बैठे रहेंगे? वैसे एक नज़रिये से देखा जाये तो चार इंजनों वाली सरकार भी तो उन्हीं की है




























































