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निशानेबाज़ी के वैश्विक पटल पर देश के लिये गोल्ड मैडल के साथ चमका रायगढ़-सारंगढ़ का बेटा दिव्यांशु, 10 मीटर एयर राईफ़ल शूटिंग वर्ल्ड कप (जूनियर) की मिक्स कैटेगरी में भारत को दो गोल्ड, विश्व रिकार्ड भी हुआ क़ायम

  • sports
  • April 27, 2026
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बीते 17 अप्रैल से मिश्र के कायरो (इजिप्ट) में निशानेबाज़ी का वर्ल्ड कप (जूनियर) हो रहा है, निशानेबाज़ी के इस वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर राईफ़ल कैटेगिरी में रायगढ़-सारंगढ़ के दिव्यांशु देवांगन भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, 24 अप्रैल को मिक्स कैटेगिरी में दिव्यांशु देवांगन और शांभवी क्षीरसागर ने भारत को गोल्ड मैडल दिलाते हुए वर्ल्ड रिकार्ड भी क़ायम किया है। देश के लिये वर्ल्ड रिकार्ड के साथ गोल्ड मैडल लाने वाले दोनों ही बच्चों ने ना केवल अपने माता-पिता, अपने परिवार, अपने शहर, अपने प्रदेश का नाम रौशन किया है बल्कि देश का सम्मान भी खेल के वैश्विक मंच पर बढ़ाया है, लिहाज़ा दिव्यांशु और शांभवी बधाई के हक़दार हैं, उन्होंने साबित कर दिया है कि आने वाले समय में अपनी असाधारण खेल प्रतिभा से देश का मान बढ़ाते रहेंगे।

ग़ौरतलब है कि दिव्यांशु देवांगन (यमन) की मां यामिनी देवांगन आकाशवाणी की उद्घोषका के साथ साथ एक सधी हुई मंच संचालक भी हैं, वर्तमान में वो रायगढ़ के केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षिका हैं वहीं दिव्यांशु के पिता शैलेंद्र देवांगन हैं जो कि अविभाजित रायगढ़ जिले के सारंगढ़ से ताल्लुक रखते हैं और वर्तमान में पोस्ट ऑफ़िस कलेक्टोरेट ब्रांच रायगढ़ के सहायक पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। दिव्यांशु के दादा स्वर्गीय धन्नूलाल देवांगन और दादी सेवती देवांगन हैं वहीं नाना देवलाल देवांगन पंजाब बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी और मशहूर पखावज वादक हैं, नानी श्रीमती चंद्रा देवांगन सितार वादक हैं, देवलाल और चंद्रा देवांगन का परिवार संगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित है और वर्तमान में चक्रधर संगीत महाविद्यालय का संचालन कर रहा है।

दिव्यांशु की स्कूलिंग रायगढ़ के डीपीएस और केन्द्रीय विद्यालय से हुई, 2018 से निशानेबाज़ी गेम से जुड़ाव राजस्थान में प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग के दौरान हुआ, कोरोना के दौर में सब कुछ छोड़कर दिव्यांशु को घर लौटना पड़ा, अपने बेटे की प्रतिभा को पहचानकर निखारने के लिये कोरोना का दौर ख़त्म होने के बाद यामिनी हर दो महीने में 15 दिनों के लिये निशानेबाज़ी की ट्रेनिंग दिलाने दिल्ली ले जाया करती थी, वहां कोच भवानी हाईबुरू ने दिव्यांशु के स्पार्क को अच्छे से पहचाना और उस पर काम करना शुरू किया, ड्राई होल्डिंग के नाम पर होम वर्क मिलता था जिसे रायगढ़ में रहकर सुविधाओं के अभाव के बीच पूरा करता था, दिल्ली में दिव्यांशु को भगवान की तरह मिले कोच ने ऑफ़ द रेंज भी रूटीन, डाक्टर, शिड्यूल को लेकर प्राॅपर गाइडेंस देते हुए ग्राउण्डेड रहना सिखाया। एयर राईफ़ल शूटिंग एक ओलम्पिक गेम है, पहला इंडीविजुअल मैडल 2008 में अभिनव बिंद्रा लेकर आये थे, आज भी इस गेम में बहुत ज़्यादा काॅम्पीटीशन है बावजूद इसके दिव्यांशु ने इसी खेल में ख़ुद को झोंक दिया, रायगढ़ में शूटिंग रेंज ना होने के कारण दिव्यांशु एक घंटे तक घर में ही होल्डिंग प्रेक्टिस करता था साथ ही जिंदल की पुरानी रेंज में भी प्रैक्टिस की, स्कूलिंग के दौरान इंटर केवी टूर्नामेंट में बैक टू बैक दो साल गोल्ड मैडल हासिल किया था, कायरो वर्ल्ड कप के लिये चयन प्रक्रिया के दौरान पांच मैचेज़ में दिव्यांशु का अच्छा प्रदर्शन रहा जबकि अंतिम मैच में 632.7 ओलंपिक लेवल का स्कोर अचीव करने पर जूनियर वर्ल्ड कप के लिये चयन हुआ था। कायरो वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर राईफ़ल की मिक्स कैटेगिरी में दिव्यांशु ने शांभवी के साथ मिलकर ना केवल वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया बल्कि भारत को गोल्ड मैडल भी दिलवाया, विश्व स्तर पर इस बड़ी खेल उपलब्धि के लिय दिव्यांशु-शांभवी के साथ उनके कोच भी बधाई के हक़दार हैं। दिव्यांशु का फ़ाईनल ड्रीम तो ओलम्पिक है यह क़ामयाबी तो उसकी यात्रा का एक पड़ाव मात्र है। दिव्यांशु जैसी तमाम असाधारण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिये ज़रूरी है कि यहां खेल की हर विधा से जुड़े अत्याधुनिक संसाधनों में बढ़ोत्तरी की जाये, एक बढ़िया शूटिंग रेंज की भी स्थापना बेहतर कोच के साथ हो। बहरहाल, रायगढ़-सारंगढ़ के लाल दिव्यांशु को इस बड़ी क़ामयाबी के लिये बधाई और अगले सफ़र के लिये शुभकामनायें, दिव्यांशु को फ़ोकस एकदम क्लीयर है इसलिये उम्मीद है कि अगले ओलम्पिक में भारत को शूटिंग के लिये गोल्ड दिव्यांशु के खाते से भी आयेगा।

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