न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव के बाद 10 दिनों के गहन उपचार और फिजियोथेरेपी से भी मिली मदद
झारसुगुड़ा जिले के कंधाहिकेला निवासी संजय बारिक को बीते 17 अगस्त की तड़के करैत सांप ने दाहिनी पिंडली में काट लिया, सर्पदंश के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें उपचार के लिए रायगढ़ के डॉ. आरएल हॉस्पिटल एवं टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर लेकर पहुंचे, अस्पताल में जांच के दौरान मरीज़ में सर्पदंश के कारण न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव पाया गया, इसके चलते मरीज़ को पलक झुकने (Ptosis) की समस्या भी हुई, चिकित्सकों ने तत्काल आवश्यक उपचार शुरू करते हुए मरीज़ को लगातार निगरानी में रखा, उपचार के दौरान मरीज़ को चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार फ़िजियोथेरेपी भी कराई गई, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति में सुधार लाने में मदद मिली।
क़रीब दस दिनों तक चले सघन उपचार और निगरानी के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ, 27 अगस्त को मरीज़ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, डिस्चार्ज के समय मरीज़ की स्थिति स्थिर एवं आरामदायक थी, चिकित्सकों ने उन्हें पांच दिन बाद फॉलो-अप जांच के लिए अस्पताल आने की सलाह दी। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि “सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है, ख़ासकर न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश में मरीज़ की स्थिति पर लगातार निगरानी और आवश्यकतानुसार उपचार देना ज़रूरी हो जाता है। आरएल हॉस्पिटल प्रबंधन की तरफ़ से लोगों को सलाह दी गई कि “सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने की बजाय मरीज़ को तत्काल अस्पताल पहुंचाएं, जिससे कि सघन उपचार के बाद उसकी जान बचाई जा सके।”













































