रायगढ़। निःसंतानता को लेकर लोगों के बीच एक बड़ी भ्रांति है कि यदि किसी दंपती को लंबे समय तक संतान नहीं हो रही है, तो IVF ही आखख़री उम्मीद है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया अग्रवाल कहती हैं “ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, हर दंपति को IVF की आवश्यकता नहीं होती, समस्या के कारण और जांच की रिपोर्ट के आधार पर दवाओं, IUI, हिस्टेरोस्कोपी, लैप्रोस्कोपी या आवश्यक छोटी सर्जरी से भी गर्भधारण संभव हो सकता है।” उनकी इस बात का सटीक प्रमाण पुसौर रायगढ़ के एक दंपति का अनुभव है, इस दंपति ने बताया कि उनकी शादी को क़रीब चार साल हो चुके थे, लेकिन उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाया था, उन्होंने कई जगह उपचार कराया पर सफ़लता नहीं मिली, बाद में यू ट्यूब चैनल पर डॉ. प्रिया अग्रवाल को IVF/IUI और निःसंतानता से संबंधित जानकारी देते हुए देखा, इसके बाद उन्होंने डॉ आर एल हॉस्पिटल एवं IVF सेंटर में डॉ. प्रिया अग्रवाल से परामर्श लिया। दंपती के बताया कि डॉ. प्रिया अग्रवाल ने उनकी समस्या को समझकर आवश्यक उपचार और दवाओं की सलाह दी, उपचार के बाद 21 अगस्त 2026 को आई. यू. आई. के माध्यम से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई, लंबे इंतजार के बाद संतान सुख मिलने पर दंपति ने डॉक्टर और अस्पताल के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ. प्रिया अग्रवाल के मुताबिक़ IUI भी कई दंपतियों के लिए गर्भधारण का प्रभावी विकल्प हो सकता है और हर मामले में IVF की ज़रूरत नहीं पड़ती, कुछ मामलों में दवाओं से ही परिणाम मिल जाता है, जबकि बच्चेदानी या फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्या होने पर हिस्टेरोस्कोपी या लैप्रोस्कोपी के माध्यम से उपचार किया जा सकता है, छोटे फ़ाइब्रॉइड जैसी समस्याओं का उपचार करने के बाद भी प्राकृतिक गर्भधारण संभव हो सकता है, इसलिए निःसंतानता की स्थिति में दंपतियों को सीधे IVF को अंतिम विकल्प मानने की बजाय पहले विशेषज्ञ से उचित जांच और परामर्श लेना चाहिए, सही कारण की पहचान होने पर कम जटिल और कम ख़र्चीले उपचार से भी संतान सुख मिल सकता है।













































