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सतत् आजीविका सृजन कर रहा है हिंडाल्को, कोसा सिल्क बुनाई की प्राचीन कला को पुनर्जीवित करने संवेदनशील पहल

कोसा सिल्क बुनाई के भविष्य को बदलने प्रतिबद्ध हैं हम :  सौरभ खेडेकर

ताना-बाना समारोह में हिंडाल्को से सम्मानित हुए कोसा बुनकर

रायगढ़। “मैं छत्तीसगढ़ में पिछले 20 वर्षों से बुनाई कर रहा हूँ, पहले हम साहूकारों के पास काम करते थे, उस समय हमें कम पैसे मिलते थे और हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन जब से मैं कोसला से जुड़ा हूँ, आय बढ़ गई है। कोसा सिल्क धागा और बुनाई की दूसरी तमाम ज़रूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। हिंडाल्को ने हम बुनकरों के जीवन में कई बदलाव लाए हैं, अब हम ज़्यादा कमाई के साथ बचत भी कर पा रहे हैं।” यह कहना है 38 वर्षीय बुनकर सुंदर लाल देवांगन का, जो कोसला से पिछले 18 महीनों से जुड़कर काम कर रहे हैं। कोसला आजीविका और सामाजिक फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी सामाजिक उद्यम है, जो आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख मेटल कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ की सहायक कंपनी है। कोसला छत्तीसगढ़ के कोसा रेशम बुनकरों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंगलवार को कोसला द्वारा रायगढ़, चांपा और दूसरे जिलों के बुनकरों को उनके सार्थक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। बुनकर, रंगरेज़ और कोसा धागा निर्माताओं सहित कोसला समुदाय के सदस्यों के लिए आयोजित ‘ताना-बाना समारोह’ में कुल 23 योगदानकर्ताओं को हिंडाल्को के सीईओ, स्पेशियलिटी एल्युमिना एंड केमिकल्स बिजनेस सह निदेशक-कोसला सौरभ खेडेकर के हाथों सम्मानित किया गया। उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए सौरभ खेडेकर ने कहा- “हम आपको परिवार की तरह मानते हैं और इस प्राचीन कला शिल्प के प्रति आपका योगदान अभूतपूर्व है, हम पारंपरिक प्रथाओं को जीवित रखने, सभी प्रक्रियाओं को मानवीय, न्यायसंगत और पारिस्थितिक रूप से संतुलित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कोसला के माध्यम से हमारा लक्ष्य कारीगरों के लिए आर्थिक अवसरों को बढ़ाना, उन्हें ऐसे उत्पाद बनाने में अपनी उत्कृष्टता और त्रुटिहीन कलात्मकता को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करना है, जिससे यह कला नई ऊचाइयों को छू सके। छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क से खूबसूरती के साथ डिज़ाइन, हाथ से बुनी गई साड़ियां, दुपट्टे और स्टोल दुनिया भर में पसंद किये जा रहे हैं।

ताना बाना समारोह में रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध कथक कलाकार मौलश्री सिंह द्वारा कथक नृत्य प्रदर्शन के साथ कोसा बुनाई के सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिसने अपनी सुंदर कलात्मकता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर अपने संबोधन में कोसला परियोजना की सीईओ नीता शाह ने कहा खि “ताना बाना कारीगरों के अथक प्रयासों को पहचानने और उनके शिल्प का जश्न मनाने का हमारा एक प्रयास है, इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य रेशम उत्पादन विभाग, रायपुर के निदेशक एस.के. कोहलेकर, बुनकर सेवा केंद्र रायगढ़ के सहायक निदेशक आर.एस. गोखले, हिंडाल्को के ज्वाइंट प्रेसिडेंट स्पेशलिटी एल्युमिना बिजनेस शिशिर मिश्रा सहित काफी लोग मौजूद थे।

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