भारतीय रेल्वे में ऑपरेटिंग गार्ड के पद पर सेवायें देने के बाद सेवानिवृत्ती का जीवन जी रहे नारायण प्रसाद छड़ीमली का आज 31 अक्टूबर शनिवार की दोपहर सोनकर पारा स्थित निवास में दुःखद निधन हो गया। 89 वर्ष की आयु में परलोक सिधारे नारायण प्रसाद छड़ीमली अपने पीछे दो पुत्रों, तीन पुत्रियों और नाती-पोतों सहित भरा पूरा समृद्ध परिवार छोड़कर गये हैं। वे दिवंगत कमल प्रसाद छड़ीमली और वीरेंद्र नारायण छड़ीमली (विक्की) के पिता थे। कल 1 नवंबर रविवार सुबह 11बजे रेल्वे काॅलोनी सोनकर पारा से कयाघाट मुक्तिधाम के लिये निकलेगी। ग़ौरतलब है कि दिवंगत नारायण प्रसाद छड़ीमली सम सामयिक मुद्दों पर लेखन के प्रति भी गंभीर थे, एक दौर ऐसा भी था जब केलो प्रवाह, रायगढ़ संदेश, जनकर्म जैसे स्थानीय दैनिक सनाचार पत्रों के अलावा तत्कालीन साप्ताहिक बयार और स्पूतनिक में भी उनके लेख प्रकाशित होते थे, वे बेहद मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे, उनका निधन शहर के अच्छे लोगों की सूची के लिये अपूरणीय क्षति है।








































