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मॉस्को तक पहुंची रायगढ़ की “माटी के रतन” मोहन सागर की रंग-साधना

चेखव इंटरनेशनल थियेटर फ़ेस्टिवल में हुआ “मिड समर नाईट” का शानदार मंचन, वरिष्ठ रंगकर्मी अमितोष नागपाल ने किया है निर्देशन

IKSVV खैरागढ़ में डॉ योगेन्द्र चौबे से मोहन ने ली है रंगमंच की तालीम, NSD रेपर्टरी से निकलकर मुंबई में कर रहे हैं थियेटर

प्रतिभा न सीमाओं की मोहताज होती है, न संसाधनों की। अगर जुनून हो और मंज़िल पाने की ललक, तो गांव की गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचना भी मुमकिन है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले के छोटे से गांव गेजामुड़ा के अभिनेता और गायक मोहन सागर ने यही कर दिखाया है। उन्होंने हाल ही में रूस की राजधानी मास्को में आयोजित चेखव इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल में अपने नाट्य प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया।

इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इस बार भारत का प्रतिनिधित्व मुंबई की मंडली टॉकीज और मंत्रमुग्ध प्रोडक्शन के बैनर तले हुआ। चर्चित निर्देशक अमितोष नागपाल द्वारा निर्देशित और शेक्सपियर की मूल कृति पर आधारित नाटक “मिडिल क्लास ड्रीम ऑफ ए समर्स नाइट” को मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस नाटक का अंग्रेजी अनुवाद स्वयं अमितोष नागपाल ने किया है, और इसका मंचन मास्को में कुल चार बार किया गया। हर शो में दर्शकों ने प्रस्तुति को भारी सराहना और तालियों से नवाजा।

इस नाटक में प्रमुख भूमिकाओं में नेहा, कंगन, संदेश, प्रियशा, जाह्नवी, ओंकार, केवल, स्वानंदी और मोहन सागर जैसे युवा कलाकारों ने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता का परिचय दिया। फ़िलहाल मोहन सागर मुंबई में ‘द हरमोनियम बैंड’ नामक अपना संगीत समूह चला रहे हैं, जो शास्त्रीयता और लोक संगीत का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। इसके अलावा, वह नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होने वाली फिल्म “गांधारी है” में तापसी पन्नू और मीता वशिष्ठ के साथ बतौर अभिनेता और छत्तीसगढ़ी डायलॉग कोच के रूप में काम कर रहे हैं, जो राज्य के भाषाई और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।


मोहन सागर की इस बड़ी उपलब्धि पर कलाकार बिरादरी से हुतेंद्र ईश्वर शर्मा, तरुण बघेल, अनुपम पाल, श्याम देवकर, भरत निषाद, रविन्द्र चौबे, विवेक तिवारी, युवराज सिंह आज़ाद, राजेश जैन, टिंकू देवांगन, मुकेश चतुर्वेदी, नेतराम यादव, राजेंद्र तिवारी सहित रंगकर्मियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और छत्तीसगढ़ की मिट्टी को गौरवान्वित करने के लिए आभार व्यक्त किया।

गांव की पगडंडियों से शुरू हुई मोहन सागर की कला यात्रा ये साबित करने के लिए पर्याप्त है कि “जब सपनों में पंख होते हैं, तो गांवों से उड़ान भर कर कलाकार सीधे विश्व मंच तक पहुंच जाते हैं।”

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