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फ़्लाई ऐश के प्रॉपर डिस्पोज़ल पर क्यों गंभीर नहीं दिखता भारत सरकार का उपक्रम NTPC LARA PROJECT..?

बीते साल 2024 के जनवरी महीने की 24 तारीख़ को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रायगढ़ में 15800 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए (2×800) मेगावाट की NTPC LARA परियोजना इकाई के पहले चरण का लोकार्पण करते हुए सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण की आधारशिला रखी थी। कोयला आधारित बिजली उत्पादन के भारत सरकार के इस कारखाने के जरिए एक तरफ़ जहां उत्पादन के क्षेत्र में काफी तरक्की की है वहीं इस अंचल के सामाजिक सांस्कृतिक और आधारभूत संरचना से जुड़े विकास कार्यों में हमेशा आगे बढ़कर योगदान दिया। मगर जब बात पावर प्लांट से हर रोज़ सैकड़ों टन की तादाद में निकलने वाले वेस्ट यानि फ़्लाई ऐश के डिस्पोज़ल को लेकर भारत सरकार के NTPC LARA परियोजना की ना तो गंभीरता दिखाई देती है और ना ही संवेदनशीलता, यही कारण है कि इस बिजली कारखाने से हर रोज़ बड़ी तादाद में निकलने वाली फ़्लाई ऐश को शासन द्वारा निर्धारित प्रावधानों को धता बताते हुए डिस्पोज़ल किया जा रहा है, फ़्लाई-ऐश परिवहन में लगी वाहनों और ठेकेदारों से शासन के तय प्रावधानों के तहत् फ़्लाई-ऐश डिस्पोज़ल करवाना कारखाना प्रबंधन की है, लेकिन अफ़सोस NTPC कारखाना प्रबंधन अपने गेट से बाहर निकालने के बाद फ़्लाई-ऐश से लदी वाहनों पर कोई नियंत्रण नहीं रखता, फिर चाहे फ़्लाई-ऐश को ट्रांसपोर्टर्स सड़क किनारे ही क्यों ना डंप करते रहें।

ग़ौरतलब है कि जिला प्रशासन की सख़्त कार्रवाईयों के दौरान ऐसी कई वाहनों को फ़्लाई-ऐश के अवैध परिवहन और डंपिंग करते हुए मौक़े पर ही पकड़ा है। चूंकि NTPC LARA परियोजना भारत सरकार का उपक्रम है लिहाज़ा इस अंचल के असंतुलित होते पर्यावरण को बचाने ज़रूरी है कि यहां से फ़्लाई-ऐश डिस्पोज़ल में लगातार बरती जा रही अनियमितताओं के मद्देनज़र उच्च स्तरीय जांच करवाई जाये, जिससे ये तो पता चल सके कि फ़्लाई-ऐश डिस्पोज़ल में बरती जा रही लापरवाहियों के नेपथ्य में परिवहनकर्ताओं और कारखाना प्रबंधन से जुड़े किसी अधिकारी या कर्मचारी का कोई गठजोड़ तो नहीं है।

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