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इंसानियत, मानवीय संवेदना और SMISS-AP कॉन्फ्रेंस में गौतम अदाणी साहब का वक्तव्य

मुंबई में SMISS-AP का पांचवां वार्षिक सम्मेलन हो रहा है, SMISS-AP का मतलब सोसायटी फॉर मिनिमली इनव्हेसिव्ह स्पाईन सर्जरी है जो कि एशिया पैसेफिक मे कार्यरत है। यह संस्था ऐसे स्पाईन, न्यूरो और ऑर्थोपेडिक सर्जन का अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिन्होंने मिनिमली इनव्हेसिव्ह स्पाईन सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल करने का विकल्प चुना है। 11 जुलाई को प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अदाणी भी SMISS-AP के इस सम्मेलन में शरीक़ हुए, मंच से उनका उद्बोधन उनके ही चैनल NDTV में सुनने का अवसर मिला। यक़ीन मानिये बेहद गहरे तक भावुक कर देने वाला उनका उद्बोधन मुझे लगा, जिसमें उन्होंने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने पर ज़ोर दिया साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य और तक़नीक के क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देने को लेकर भी कई बातें करते हुए एकेडमिक ट्रेनिंग को ज़रूर बताया। उन्होंने आगे कहा कि “भारत में लोअर बैक पेन बहुत तेज़ी के साथ बढ़ रहा है, जो कि हेल्थ के क्षेत्र में नेशनल क्राईसिस है, अडानी ग्रुप डॉक्टर्स के साथ काम करने के लिए तैयार है क्योंकि डॉक्टर उम्मीद होते हैं।

इसी कार्यक्रम में गौतम अदाणी साहब ने निजी बातें साझा करते हुए बताया कि कैसे वो मात्र 16 साल की उमर में बिना किसी बड़े बैक-अप के बड़े सपने के साथ मुंबई चले आये थे, अदाणी साहब ने यह भी कहा कि “सपने वो नहीं होते जो नींद में देखे जायें, सपने तो वो होते हैं जो आपकी नींद उड़ा दें।” गौतम अदाणी साहब ने सम्मेलन में मौजूद लोगों को बताया कि उनकी पसंदीदा फ़िल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस है क्योंकि यह फ़िल्म मानवीय संवेदना, इंसानियत का संदेश देती है।

यक़ीन मानिए, गौतम अदाणी साहब की प्रेरक बातें सुनकर एकबारगी मेरा गला भर आया, मगर उस स्थिति से बाहर तब निकलना पड़ा जब अदाणी साहब के उद्बोधन में इंसानियत और मानवीय संवेदना की बात सुनी। मैं तो ठहरा रायगढ़ का और रायगढ़ जिले के तमनार मुड़ागांव में महाजेंको के एमडीओ अदाणी समूह की सरपरस्ती में अमानवीय संवेदनहीन तरीक़े से हज़ारों हरे भरे ज़िदा दरख़्तों (पेड़ों) की हत्या करके जंगल ख़त्म किया जा रहा है, इस इलाक़े में जंगलों पर निर्भर रहने वाला आदिवासी समुदाय असहाय महसूस कर रहा क्योंकि सूबे की सत्ता का खुला संरक्षण जंगल ख़त्म करने वाले कार्पोरेट्स को मिल रहा है। विरोध के नाम पर जन चेतना जैसे प्रतिबद्ध संगठन आदिवासियों को साथ लेकर उनके हक़ अधिकार और संस्कृति से जुड़े जंगल बचाने का संघर्ष कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस अपनी खोई राजनैतिक ज़मीन बचाने की जुगत लगाकर इस आंदोलन में कूद पड़ी है। इधर दूसरे लेवल पर कांग्रेस भाजपा का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इन्हीं सब हालातों के बीच बेरहमी से जंगल काटे जा रहे हैं।

बहरहाल, गौतम अदाणी साहब से गुज़ारिश है कि आज आपने SMISS-AP के तीन दिवसीय मुंबई अधिवेशन में मुन्नाभाई एमबीबीएस फ़िल्म का ज़िक्र करके इंसानियत और मानवीय संवेदना की जो बात कही वो दिल को छू लेने वाली तो है मगर हम आपसे ऐसी अपेक्षा भी करते हैं कि औद्योगिक विकास के नाम पर रायगढ़ जिले के तमनार मुड़ागांव सराईटोला क्षेत्र में कट रहे जंगल के प्रति और इन जंगलों पर आश्रित आदिवासी समुदाय के प्रति थोड़ी मानवीय संवेदना, इंसानियत ज़रूर दिखायें….प्लीज़

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