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असमंजस भरे हालातों से कैसे बाहर आयेगी छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा नीति?

भारत सरकार की नई शिक्षा नीति NEP-2020 के तहत् अब 6 साल की उम्र पूरी करने पर ही बच्चे का पहली कक्षा में दाखिला लिया जा सकेगा, लेकिन किस महीने की कौन सी तारीख़ तक बच्चे की 6 साल उम्र पूरी होनी चाहिए, इस संबंध में शिक्षा विभाग के तरफ़ से कोई स्पष्टीकरण नहीं है। इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ राज्य RTE यानि शिक्षा के अधिकार पोर्टल में उपलब्ध आयु गणना की जानकारी पर अगर संज्ञान में लिया जाए तो उसके अनुसार नर्सरी में एडमिशन के लिए 31 मार्च की स्थिति में तीन साल पूरा करना अनिवार्य है, यानि नर्सरी के लिए बच्चे की उम्र 3 से 4 साल के बीच होनी ज़रूरी है, इस आधार पर KG-I के लिए 4 से 5 वर्ष की उम्र और पहली कक्षा के लिए 5 से 6 साल 6 महीने तक के बच्चों को प्रवेश दिया जा सकता है। अब यहां स्कूल प्रबंधन और पैरेंट्स के लिए सबसे बड़ी समस्या ये खड़ी हो गई है कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को फ़ॉलो करें या आरटीई पोर्टल के प्रावधानों को। नई शिक्षा नीति के तहत् शाला प्रवेश के अभी जो प्रावधान हैं, उसके मुताबिक़ अगर बच्चा 31 मार्च के बाद किसी भी महीने की किसी भी तारीख़ को तीन साल की उम्र पूरी कर रहा है, उसे या तो अगले शिक्षा सत्र में प्रवेश मिलेगा या स्कूल प्रबंधन और पैरेंट्स अपने रिस्क में एडमिशन करवायेंगे। ऐसे में आगे चलकर जब बच्चा बोर्ड की कक्षाओं में पहुंचेगा, तो उस समय उसे उम्र को लेकर कोई समस्या तो नहीं आयेगी? इस सवाल का जवाब फ़िलहाल अनुत्तरित है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने पाठ्य पुस्तकों को लेकर निजी स्कूल प्रबंधन और प्रकाशकों के गठजोड़ पर लगाम लगाने के लिहाज़ से NCERT और SCERT की पुस्तकों की ही मान्यता देने का महत्वपूर्ण फ़ैसला लिया था, लेकिन नये शिक्षा सत्र को शुरू हुए तक़रीबन महीने भर होने का आ गये, फिर भी छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने SCERT की क़िताबों की आपूर्ति पूरी नहीं की है, इन विषम हालातों में तो बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ना ही है। अब सरकार द्वारा पोषित स्कूली शिक्षा का आधार भला कैसे मज़बूत हो सकेगा।

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