
26 अक्टूबर 2022 को मयंक मित्तल (मिट्ठु) की आत्महत्या के बाद सुरेश गोयल, प्रदीप अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, प्रकाश निगानिया की अगुवाई में सर्व समाज की बैठक 27 अक्टूबर को अग्रसेन भवन में हुई थी, जिसमें पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए थे। बैठक में चौतरफ़ा दबाव की वजह से पुलिस ने जुआ-सट्टा के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा था, इसी कड़ी में ट्रिनिटी होटल में भी जुए की पुष्टि होने के बाद डीवीआर की ज़ब्ती हुई थी, यहां अनैतिक कार्य व्यापार तो तब के दौर से चल रहा है जी…..
अब आते हैं देह व्यापार के ख़िलाफ़ रायगढ़ पुलिस की पीटा एक्ट के तहत् की जाने वाली कार्रवाई पर, तो 2019 में रायगढ़ जिले को पीटा एक्ट के दायरे में लिया गया, शुरूआत में इक्का दुक्का कार्रवाईयों ही हुईं फिर तक़रीबन 7 साल का लंबा अंतराल….मगर अब जिस तेज़ी से रायगढ़ में पीटा एक्ट के तहत् धड़ाधड़ कार्रवाईयां हो रही हैं और सफ़ेदपोश चेहरे एक्सपोज़ हो रहे हैं, उसे लेकर समाज में नये पुलिस कप्तान की कार्यशैली की सराहना भी हो रही है।


मगर यहां पर लाख टके का ये सवाल खड़ा होता है कि क्या ऐसा असामाजिक और घृणित कारोबार अभी अभी शुरू हुआ है या लंबे समय से होता आ रहा है? अगर लंबे समय से होता आ रहा है तो किसके संरक्षण में? पुलिस ने पीटा एक्ट के तहत् कितनी कार्रवाई की? हालांकि अनैतिक देह व्यापार को लेकर होटल ट्रिनिटी के स्पा सेंटर बनाम चकलाघर में पुलिस ने दबिश दी, उसके बाद हुई गिरफ़्तारियां और बचा दिये गये चेहरों को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर ऊंगलियां उठ रही हैं, बावजूद इसके शहर में अनैतिक कारोबार को लेकर पुलिस की ताबड़थोड़ कार्रवाई से समाज में थोड़ी ही सही राहत तो है, आज के अराजक हो चुके दौर में लोगों को राहत ही तो चाहिए लिहाज़ा फ़ायर तरीक़े से बिना किसी पक्षपात के कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।







































