रंगमंच की सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर होगा चक्रधर समारोह के अंतिम दिवस का मंच
रायगढ़। कहते हैं छत्तीसगढ़ के बस्तर से नक्सल गतिविधियों का पूरी तरह ख़ात्मे हो गया है, भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के साझा ऑपरेशन में बड़े पैमाने पर हार्डकोर नक्सली या तो मार दिये गये हैं या फिर अधिकांश ने बंदूक का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और उनके परिवारजनों के लिये सरकार की पुनर्वास नीति भी धरातल पर उतार दी गई है, इसी नीति के तहत् बस्तर में पुनर्वास केंद्र संचालित किये जा रहे हैं और इसी नीति के तहत् संचालित अलग अलग तरह की गतिविधियों को जरिया बनाकर पुनर्वास केंद्र में रह रहे पूर्व नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में लाने की कोशिश की जा रही है। इन्हीं कोशिशों का एक सुक़ून देने वाला परिणाम नारायणपुर से “चंदा-चकोर” नाट्य प्रस्तुति के रूप में निकलकर आया है।





यह नाटक नारायणपुर में जिला प्रशासन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के सहयोग से बीते दिनों संपन्न हुई नाट्य शिविर में तैयार किया गया था, इस नाट्य शिविर में पुनर्वास केंद्र के पूर्व नक्सलियों और उनके परिवारजनों के अलावा नारायणपुर की जेन ज़ी ने हिस्सा लिया था, शिविर का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हीरा मानिकपुरी ने किया और “चंदा-चकोर” नाटक तैयार करवाया। इस नाटक में तक़रीबन 50 लोगों ने काम किया, नाटक का संगीत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ही स्नातक गरिमा दिवाकर ने तैयार किया, आर्ट एण्ड क्राफ़्ट का जिम्मा अरुण भांगे (बिलासपुर) ने संभाला है। नाटक “चंदा-चकोर” के कुछ सफल शोज़ नारायणपुर में हो चुके हैं, चक्रधर समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस साल सभी कलाओं की समावेशी ख़ास विधा रंगमंच को अंतिम दौर में शामिल किया, जिसके परिणामस्वरूप आज 23 दिसंबर बुधवार की शाम समारोह के समापन अवसर पर नाटक “चंदा-चकोर” की प्रस्तुति होनी है, वैसे तो इस नाटक की अवधि तक़रीबन एक घंटे है मगर आयोजन समिति द्वारा प्रस्तुति के लिये महज़ 20 मिनट दिये गये हैं लिहाज़ा नाटक के मूल कथ्य के साथ ज़रूरी संदेश को दर्शकों तक पहुंचाने के लिये नाटक के कुछ हिस्से निर्देशक हीरा मानिकपुरी ने एडिट कर दिये हैं। बहरहाल, नारायणपुर के नवोदित रंगकर्मी बेहतर कल, बेहतर समाज और बेहतर देश के सपने का ताना-बाना लेकर रायगढ़ पहुंच चुके हैं, अब बारी रायगढ़ की है इन तमाम कलाकारों की प्रतिभा का सम्मान करने की…..शाम 8:30 बजे नाटक देखने चक्रधर समारोह में आयें, इतना तो तय है कि नाटक में बस्तर का लोक संगीत और बस्तरिया जन-जीवन मंच पर देखना आपको अलग ही अनुभूति देगा।








































