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आख़िर रायगढ़ कैसे पहुंचा 1971 के युद्ध का साक्षी टैंक “विजय”…..जानिये हक़ीक़त


रायगढ़ शहर में खबर को लेकर दिलचस्पी रखने वाले लोगों को पिछले दिनों आश्चर्यचकित रह जाना पड़ा जब अकस्मात १९७१ में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अपनी सामरिक क्षमता का लोहा मनवा देने वाला टैंक विजय रायगढ़ पहुंच गया। रायगढ़ के लोगों के लिये चकित होना इसलिये भी अस्वाभाविक नहीं था क्योंकि रायगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में सैन्य सेवाओं को लेकर जो रूझान और जागरूकता होनी चाहिये उसका बड़ा अभाव है। ऐसे में इस टैंक विजय का रायगढ़ पहुंचना स्वाभाविक रूप से यहां के लोगों के लिये आश्चर्यजनक था।
टैंक विजय का रायगढ़ आना, कैसे आना और क्यों आना की भी एक यात्राकथा है जिसकी शुरूआत आज से तकरीबन दो साल पहले नई दिल्ली के बसंतकुंज नामक कालोनी से हुई थी जहां रायगढ़ के माटी पुत्र शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के छोटे भाई कर्नल अनय त्रिपाठी का परिवार रह रहा था क्योंकि अनय की पोस्टिंग एक नो फैमिली स्टेशन में हो गई थी। दिल्ली में बसंतकुंज में ही रहने के दौरान कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता से मिलने आये कुछ गैर सरकारी संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनसे लम्बी बातचीत करने के बाद यह बताया कि “आप अपने शहर में अपने बेटे शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की स्मृति में कोई वॉर ट्रॉफी क्यों नहीं लगा रहे हैं, जबकि भारतीय सेना मुख्यालय वॉर ट्रॉफी नि:शुल्क प्रदान करता है। उनकी शर्त सिर्फ यही रहती है कि वे ट्रॉफी का जो भी परिवहन व्यय हो तथा उसके रख-रखाव सुरक्षा की जिम्मेदारी की गारंटी देने पर ही वॉर ट्रॉफी संबंधित शहर के लिये भेजते हैं।”
इसी संदर्भ में दिल्ली से रायगढ़ वापस लौटने के बाद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता ने रायगढ़ नगर निगम के तत्कालीन महापौर एवं आयुक्त से बातचीत की और उन्हें वार ट्रॉफी से संबंधित सारी जानकारी दी और एक पत्र के माध्यम से उनसे यह निवेदन किया कि वे अपने स्तर पर इस विषय पर अग्रिम कार्यवाही अगर करेंगे तो उसके सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं और फिर कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता ने इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़-ओडि़सा एरिया के कमांडर, ब्रिगेडियर बावा से रायपुर स्थित उनके गेस्ट हाउस में मुलाक़ात की और वॉर ट्रॉफी को लेकर चर्चा की। तब ब्रिगेडियर बावा ने बताया कि “आप अपने शहर के महापौर या उनके समकक्ष जनप्रतिनिधि के माध्यम से एक पत्र हमें भिजवायें तो हम उसे भारतीय सैन्य मुख्यालय के लिये अग्रेषित करते हुए निवेदन करेंगे कि रायगढ़ को वॉर ट्रॉफी के तौर पर एक युद्ध-अस्त्र दिया जाये।” ब्रिगेडियर बावा से हुई इस चर्चा के बाद शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता ने अपने शहर रायगढ़ लौटने के बाद आयुक्त नगर पालिक निगम रायगढ़ से मुलाक़ात की और उन्हें वॉर ट्रॉफी से संबंधित जानकारी के साथ एक पत्र दिया और निवेदन किया कि “आप इस संदर्भ में कोसा रायपुर से संपर्क करते हुए रायगढ़ के लिये वॉर ट्रॉफी की मांग अगर करेंगे तो उसके सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।”
इसी निवेदन के बाद आयुक्त नगर निगम रायगढ़ की ओर से COSA (Chhattisgarh Odisha Sub Area) रायपुर के कमांडर ब्रिगेडियर बावा से संपर्क कर उनसे रायगढ़ के लिये वॉर ट्रॉफी के रूप में किसी युद्ध अस्त्र के आबंटन की प्रार्थना की गई। रायगढ़ नगर निगम के इस आवेदन को कोसा रायपुर ने भारतीय सैन्य मुख्यालय को अग्रेषित कर यह निवेदन किया कि “शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की जन्मभूमि के लिये वॉर ट्रॉफी स्थापित करने की अनुमति दी जाये।” संयोग से तब भारतीय सेना के सबसे प्रमुख अधिकारी जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और रायगढ़ के पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आशीष पांडेय सैनिक स्कूल रीवा के छात्र रहे हैं और शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी भी सैनिक स्कूल रीवा के ही छात्र थे, इसलिये रायगढ़ के लिये पाकिस्तान के ख़िलाफ युद्ध में संलग्न इस टैंक को  रायगढ़ में स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गई और इस लम्बी यात्रा के बाद पिछले दिनों यह टैंक रायगढ़ पहुंच चुका है और उसे उपयुक्त स्थल पर स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नि:संदेह इन मायनों में शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता की ओर से किये गये भावनात्मक प्रयास को यथोचित सम्मान दिये जाने की ज़रूरत है साथ ही इस वाॅर-ट्राॅफ़ी को रायगढ़ तक लाने की यात्रा में सहभागी रहे रायगढ़ के पूर्व कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, मौजूदा कलेक्टरमयंक चतुर्वेदी, पूर्व कमिश्नर सुनील चंद्रवंशी, मौजूदा कमिश्नर बृजेश क्षत्रिय, ब्रिगेडियर बावा, रायगढ़ के पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी आशीष पांडेय की भूमिका को नहीं नकारा जा सकता। रायगढ़ विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार में काबीना मंत्री ओपी चौधरी की दूरदर्शिता के कारण इस वाॅर-ट्राॅफ़ी को “ऑपरेशन सिंदूर पार्क” जैसे उपयुक्त जगह में स्थापित किया जा रहा है, ये भी बड़ी बात है।

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