OP 15 AUG
previous arrow
next arrow
OP 15 AUG
NAGRIK 15 AUG
RAKESH MISHRA 15 AUG
HINDALCO
KIRSHI 15 AUG
JAYANT 15 AUG
MSP 15 AUG
VPLOVE 15 AUG
JINDAL babu ji
SHIV HOSPITAL 02
SHIV HOSPITAL 01
BALAJI METRO ADD 14 SAL
BALAJI METRO ADD 2
RUPENDR PATEL
SHALBH AGRWAL ADD
msp
jindal
RH
3
UTTAM SCHOOL
R L ADD
Untitled-1
ispanj ayran
SANJIYANI ADD
MSP
APEX ADD
ANUPAM
SANJIVANI 1
SANJIVANI 2
SANJIVANI 3
SANJIVANI 4
SANJIVANI 5
RAIGARH ARTHO 01
RAIGARH ARTHO 02
RAIGARH ARTHO 03
RAIGARH ARTHO 03
sunground
ANUPAM ADD
UTTAM SCHOOL
GANPATI
GANPATI 2
previous arrow
next arrow
Shadow

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में केलो तट पर दशकों से स्थित है माता कात्यायनी का मंदिर, नवदुर्गा के छठवें स्वरूप में माता कात्यायनी की है मान्यता

जगत जननी मां दुर्गा के नौ रूपों में छठवां स्वरूप माता कात्यायनी का है, कात्यायन ऋषि की पुत्री होने के कारण ही इनका नाम कात्यायनी पड़ा। रायगढ़ के राजमहल से सर्किट हाऊस रोड से लगे मंदिर में लगभग चालीस सालों से विराजी हैं माता कात्यायिनी। माता कात्यायनी के मंदिर की बनावट नदी का तटीय ईलाक़ा होने की वजह से मुख्य सड़क से काफी नीचे है, मगर लगभग डेढ़ दशक पहले माता को प्रथम तल में प्रतिष्ठापित किया गया है। वैसे तो हर नवरात्रि में माता के अलग अलग स्वरूपों की विशेष पूजा आराधना होती है, मगर रायगढ़ ही नहीं बल्कि अंचल के एकमात्र कात्यायनी माता के मंदिर में साल के बारहों महीने विशेष पूजन आराधना होती है, हर रोज़ माता के वस्त्र बदले जाते हैं, श्रृंगार किया जाता है, आरती पूजन के बाद भोग भी लगता है। माता कात्यायनी मंदिर के पुजारी का पूरा परिवार माता की सेवा में लगा रहता है। जब तक माता को भोग नहीं लगता, पुजारी जी के घर का कोई सदस्य भोजन नहीं करता, यही पुजारी परिवार का माता के प्रति समर्पण  है। माता कात्यायनी के मंदिर में भी मनोकामना ज्योति कलश भक्तों के द्वारा अपने हाथों से प्रज्जवलित किये जाते हैं, माता के इस मंदिर में बेहद सीमित मनोकामना ज्योति कलश ही प्रज्जवलित किये जाते हैं। रायगढ़ ही नहीं बल्कि इस पूरे अंचल के लिये बेहद ख़ास माता मंदिर में हर नवरात्रि में सामूहिक भजन कीर्तन और भण्डारे का आयोजन होता रहा है।

माता कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है, क्योंकि ऐसी पौराणिक मान्यता है कि ब्रम्हा से अमरता के वरदान के साथ ही महिषासुर ने यह वरदान भी मांगा था कि उसकी मृत्यु नारी के हाथों हो। ब्रम्हा से वरदान मिलने के बाद महिषासुर दैत्य का आतंक समूचे ब्रह्माण्ड के लिये अनिष्ट का कारण बना, जिससे सभी देवता भी परेशान थे। अंत में माता का कात्यायनी स्वरूप ही महिषासुर की मौत का कारण बना। ऐसा माना जाता है कि माता कात्यायनी को सत्ताइस पत्तियों वाला मदार फूल बेहद प्रिय है, इसीलिये भक्त हमेशा उन्हें इसी मदार को अर्पित करते हैं। तो ये थी माता नवदुर्गा के छठवें स्वरूप माता कात्यायनी पर @khabarbayar की ख़ास रिपोर्ट.. मातारानी सबका कल्याण करें…..जय माता दी

  • Related Posts

    दोहरे मापदंडों के कारण हमेशा सवालों के घेरे में रहता है नगर निगम का अतिक्रमण के ख़िलाफ़ अभियान

    वार्ड नंबर 25 के दायरे में आने वाले कौहाकुंडा क्षेत्र के चिरंजीव दास नगर में मुख्य सड़क किनारे अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानों को निगम की अतिक्रमण निवारण टीम द्वारा…

    घरेलू LPG रसोई गैस के व्यावसायिक उपयोग पर रुक-रुककर ही सही,जारी है प्रशासन की कार्रवाई

    अन्नपूर्णा होटल पर ठोका 10 हज़ार का जुर्माना कलेक्टर ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को घरेले एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई की सख़्त हिदायत दी थी,…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    विज्ञापन